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प्रवचन/ Preaching

by Acharya Shree Nityanand Semwal Ji

व्‍यास जी कहते हैं - गृहस्‍थ ब्राह्राण को पूवोक्‍त छ: कर्मो में ही स्थित रहना चाहिये। सदा श्रद्धापूर्वक पंच महायज्ञों द्वारा परमात्‍मा का पूजन करे, सर्वदा धैर्य धारण करे। प्रमाद (अकर्तव्य कर्म को करने और कर्तव्‍य कर्म की अवहलेना करने) से बचे, इन्द्रियों को संयम में रखे, धर्म का ज्ञाता बने और मन को भी अपने अधीन रखे।..

ईश्वर से कुछ मांगने पर न मिले तो उससे नाराज न होना क्योंकि ईश्वर वह नहीं देता जो आपको अच्छा लगता हैं बल्कि वह देता हैं जो आपके लिये हमेशा अच्छा हैं. डर विश्वास से विपरीत होता हैं जब हमें डर लगता हैं तब हम भगवान् तक ये संदेश भेजते हैं की हम उसपर विश्वास नहीं करते हैं. भगवान् के सामने जो इन्सान झुकता हैं वो सबको अच्छा लगता हैं, लेकिन जो सब के सामने झुकता हैं वो इन्सान भगवान् को अच्छा लगता हैं…….